इंदौर: चार बेटों ने मां के अंतिम संस्कार से किया इनकार, समाजसेवियों ने निभाया फर्ज
मध्य प्रदेश के इंदौर से बुजुर्ग मां और उसके चार बेटों से जुड़ा एक मामला सामने आया है। सिलिकॉन सिटी क्षेत्र की गणेश रेसिडेंसी में रहने वाली लता बाई की मौत के बाद उनके चारों बेटे अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए। संस्था से जुड़े लोगों के मुताबिक, बेटों ने मां को मुखाग्नि देने से भी इनकार कर दिया। इसके बाद समाजसेवी संस्था और वृद्धाश्रम से जुड़े लोगों ने उनकी अंतिम विदाई की जिम्मेदारी उठाई।
जानकारी के अनुसार, लता बाई ने अपनी जिंदगी भर की जमा पूंजी और जेवर बेचकर गणेश रेसिडेंसी में एक फ्लैट खरीदा था। संस्था से जुड़े लोगों का आरोप है कि बाद में उनके एक बेटे ने कथित तौर पर फ्लैट अपने नाम करवा लिया और लता बाई को घर से बाहर कर दिया। इसके बाद वह बेहद मुश्किल परिस्थितियों में रहने को मजबूर हो गईं। हालांकि, इस मामले में बेटों का पक्ष सामने नहीं आया है।
लता बाई की स्थिति की जानकारी प्रीयु फाउंडेशन से जुड़े अजय नागदा को मिली। संस्था ने उनका मेडिकल चेकअप कराया और उन्हें जानकी वृद्धाश्रम में रहने की व्यवस्था की। रिपोर्टों के मुताबिक, लता बाई ने अपने जीवन के आखिरी करीब आठ महीने वृद्धाश्रम में बिताए, जहां संस्था और आश्रम से जुड़े लोग उनकी देखभाल करते रहे।
कुछ समय बाद तबीयत बिगड़ने पर उन्हें इंदौर के एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान 13 सितंबर को उनका निधन हो गया। संस्था के मुताबिक, ओम शांति आश्रम की ब्रह्मकुमारी ज्योति दीदी के माध्यम से उनके चारों बेटों को मां के निधन की सूचना दी गई थी। इसके बावजूद कोई भी बेटा अंतिम संस्कार के लिए नहीं पहुंचा।
इसके बाद प्रीयु फाउंडेशन और जानकी वृद्धाश्रम से जुड़े लोगों ने लता बाई के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद रीजनल पार्क मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार पूरे सम्मान और विधि-विधान के साथ किया गया।
इस घटना में एक ओर जहां मां की जिंदगी के आखिरी दौर में उनके परिवार से दूरी की कहानी सामने आई, वहीं दूसरी ओर समाजसेवियों और वृद्धाश्रम से जुड़े लोगों ने उनके अंतिम समय में साथ देकर मानवीय संवेदना की मिसाल पेश की।

