UPI से भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के लिए राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि ₹2,000 तक के UPI लेनदेन पर बैंक और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर किसी भी तरह का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं वसूल सकते। यह नियम पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में किए गए बदलावों के तहत लागू किया गया है।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, इस प्रावधान के तहत ₹2,000 तक के पात्र डिजिटल भुगतान में पैसा भेजने या प्राप्त करने वाले व्यक्ति से कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लिया जा सकता। इसके साथ ही RuPay डेबिट कार्ड से किए जाने वाले भुगतान को भी इस तरह के शुल्क से छूट दी गई है।
बड़े UPI भुगतान पर शुल्क की संभावना
सरकार के इस कदम से यह भी साफ हो गया है कि अब ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट लेनदेन पर शुल्क लगाने की संभावना खुल गई है। हालांकि, फिलहाल इससे यह तय नहीं होता कि हर ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर शुल्क लगेगा। सरकार को आगे यह तय करना होगा कि किन लेनदेन और किन मर्चेंट्स पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू किया जाएगा।
अगस्त 2026 में सरकार ने बड़े या चुनिंदा मर्चेंट लेनदेन पर सीमित MDR व्यवस्था की दिशा में कदम बढ़ाया था। इसका उद्देश्य बैंकों, पेमेंट कंपनियों और डिजिटल पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े खर्च को संभालना है।
आम UPI यूजर्स को क्या होगा फायदा?
सरकार के इस फैसले से रोजमर्रा के छोटे डिजिटल भुगतान पहले की तरह बिना अतिरिक्त शुल्क के किए जा सकेंगे। खासतौर पर दुकानों पर छोटी खरीदारी, बिल भुगतान और अन्य कम मूल्य वाले UPI लेनदेन करने वाले लोगों पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा।
सरकार का जोर डिजिटल भुगतान को आसान और सुलभ बनाए रखने पर है। वहीं, बड़े मूल्य के मर्चेंट लेनदेन के लिए शुल्क व्यवस्था को लेकर आगे विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। पर्सन-टू-पर्सन (P2P) भुगतान को लेकर भी सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम उपभोक्ताओं के लिए UPI को मुफ्त रखने की नीति जारी रहेगी।

