धीरज बोम्मादेवरा ने मैक्सिको के साल्टिलो में इतिहास रचते हुए 2026 आर्चरी वर्ल्ड कप फाइनल के पुरुष रिकर्व वर्ग में स्वर्ण पदक जीत लिया है। वह इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में व्यक्तिगत खिताब जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष तीरंदाज बन गए हैं।
Dhiraj Bommadevara ने फाइनल में जापान के नाकानिशी जुन्या को बेहद रोमांचक मुकाबले में 6-5 से हराया। पांच सेट के बाद दोनों खिलाड़ी 5-5 की बराबरी पर थे, जिसके बाद मुकाबला शूट-ऑफ में पहुंचा। निर्णायक तीर में धीरज ने 10 का परफेक्ट स्कोर किया, जबकि नाकानिशी 9 अंक ही हासिल कर सके।
25 वर्षीय धीरज ने फाइनल तक पहुंचने के दौरान भी शानदार प्रदर्शन किया। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने तुर्किये के बर्किम ट्यूमर को 7-1 से और सेमीफाइनल में फ्रांस के जीन-चार्ल्स वालाडोंट को 7-1 से मात दी। वह टूर्नामेंट में दूसरी वरीयता के साथ उतरे थे।
यह धीरज का वर्ल्ड कप फाइनल में तीसरा प्रयास था। इससे पहले वह 2023 और 2024 में इस प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुके थे, लेकिन पदक नहीं जीत पाए थे। साल्टिलो में मिली जीत उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गई है।
धीरज की इस जीत से भारतीय पुरुष रिकर्व तीरंदाजी का 16 साल का इंतजार भी खत्म हुआ। इससे पहले जयंत तालुकदार ने 2010 के वर्ल्ड कप फाइनल में कांस्य पदक जीता था। वहीं, वर्ल्ड कप फाइनल में व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाली भारत की एकमात्र अन्य तीरंदाज डोला बनर्जी हैं, जिन्होंने 2007 में महिला रिकर्व खिताब अपने नाम किया था।
धीरज की यह ऐतिहासिक जीत भारतीय तीरंदाजी के लिए बड़ी उपलब्धि है और पुरुष रिकर्व वर्ग में भारत के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।

