भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर दिया। यह करीब चार साल में RBI की पहली दर बढ़ोतरी है और फरवरी 2023 के बाद पहली बार रेपो रेट बढ़ाया गया है।
इस फैसले का सीधा असर बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों से लिए गए फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, पर्सनल लोन और अन्य कर्ज पर पड़ सकता है। बैंकों की ब्याज दरें बढ़ने पर नए कर्ज महंगे हो सकते हैं, जबकि मौजूदा फ्लोटिंग-रेट लोन की EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि लंबी हो सकती है।
RBI ने यह फैसला बढ़ती महंगाई के दबाव के बीच लिया है। अगस्त में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.82% हो गई थी, जो लगातार तीसरे महीने RBI के 4% के मध्यम अवधि लक्ष्य से ऊपर रही। वहीं अप्रैल-जून तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की GDP ग्रोथ 7.8% रही।
RBI ने अपनी नीति का रुख भी ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है। इसका संकेत है कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक आगे भी ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपना सकता है।
क्या आपकी EMI तुरंत बढ़ेगी? जरूरी नहीं। इसका असर आपके बैंक, लोन के प्रकार, ब्याज दर के रीसेट नियम और बकाया लोन पर निर्भर करेगा। खासकर जिनका लोन बाहरी बेंचमार्क जैसे रेपो रेट से जुड़ा है, उन पर असर अपेक्षाकृत जल्दी दिखाई दे सकता है।

