दिल्ली से सिलीगुड़ी का सफर होगा आधा, 32 की जगह 15-16 घंटे में पहुंचेगा
देश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क को आपस में जोड़कर एक बड़े हाई-स्पीड कॉरिडोर को विकसित करने की दिशा में काम चल रहा है। अंबाला-शामली, शामली-गोरखपुर और गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे को जोड़कर तैयार होने वाला यह नेटवर्क दिल्ली-एनसीआर से लेकर पूर्वी भारत और सिलीगुड़ी तक सड़क कनेक्टिविटी को तेज करेगा।
इस मेगा कॉरिडोर का सबसे बड़ा फायदा दिल्ली से सिलीगुड़ी के सफर में देखने को मिल सकता है। फिलहाल सड़क मार्ग से दिल्ली से सिलीगुड़ी पहुंचने में करीब 28 से 32 घंटे लगते हैं। प्रस्तावित हाई-स्पीड कनेक्टिविटी पूरी होने के बाद यह समय घटकर करीब 15 से 16 घंटे रह सकता है।
तीन एक्सप्रेसवे होंगे कॉरिडोर की रीढ़
इस नेटवर्क में करीब 122 किमी लंबा अंबाला-शामली एक्सप्रेसवे, लगभग 740 किमी का शामली-गोरखपुर एक्सप्रेसवे और करीब 520 किमी लंबा गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे शामिल हैं। इन परियोजनाओं के आपस में जुड़ने से उत्तर भारत और पूर्वी भारत के बीच एक लंबा हाई-स्पीड सड़क नेटवर्क तैयार होगा।
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे करीब 519.58 किमी लंबा प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है, जो उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से होकर गुजरेगा। इसका उद्देश्य गोरखपुर को सिलीगुड़ी से तेज सड़क संपर्क देना है।
‘चिकन नेक’ तक आसान होगी पहुंच
सिलीगुड़ी को भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाले रणनीतिक क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। इसे आमतौर पर ‘चिकन नेक’ या सिलीगुड़ी कॉरिडोर कहा जाता है। यह संकरा भू-भाग मुख्य भारत को पूर्वोत्तर के राज्यों से जोड़ता है।
नए एक्सप्रेसवे नेटवर्क से दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच सड़क संपर्क मजबूत होने की उम्मीद है। साथ ही माल ढुलाई और लंबी दूरी के यातायात के लिए भी वैकल्पिक हाई-स्पीड मार्ग उपलब्ध हो सकेगा।
परियोजना के अलग-अलग हिस्सों पर भूमि अधिग्रहण, डीपीआर और निर्माण संबंधी प्रक्रियाएं चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही हैं।

