गुरुग्राम में लगातार सामने आ रही जलभराव की समस्या से निपटने के लिए नगर निगम गुरुग्राम (MCG) ड्रेनेज और कैचमेंट एरिया की मैपिंग कराने की तैयारी में है। इसके तहत सुभाष चौक, आंतरिक सेक्टरों और लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियों में बारिश के पानी के बहाव और ड्रेनेज नेटवर्क का अध्ययन किया जाएगा।
अधिकारियों के मुताबिक, इस मैपिंग का उद्देश्य यह पता लगाना है कि बारिश का पानी किस दिशा में बहता है, किन स्थानों पर पानी रुकता है और ड्रेनेज सिस्टम के कौन से हिस्से पानी की निकासी में बाधा बन रहे हैं। इसके आधार पर जरूरत वाले ड्रेनों की मरम्मत, सफाई और क्षमता बढ़ाने की योजना तैयार की जाएगी।
गुरुग्राम में जलभराव की समस्या को देखते हुए प्रशासन पहले भी संवेदनशील स्थानों की पहचान कर चुका है। जून 2026 में MCG ने शहर में 36 जलभराव वाले हॉटस्पॉट चिन्हित किए थे, जिनमें से 16 स्थानों पर सुधार कार्य पूरा होने की जानकारी दी गई थी।
इसके अलावा, ड्रेनेज व्यवस्था को वैज्ञानिक तरीके से समझने के लिए ड्रोन सर्वे, लो-लाइंग क्षेत्रों का एलिवेशन मॉडल और GIS आधारित स्टॉर्म-वॉटर ड्रेन मैपिंग भी की जा चुकी है। IIT गांधीनगर ने गुरुग्राम में 273 स्थानों पर वर्षाजल संचयन की संभावनाएं भी चिन्हित की हैं।
प्रशासन का लक्ष्य सिर्फ जलभराव वाले स्थानों की पहचान करना नहीं, बल्कि बारिश के पानी के प्राकृतिक बहाव को समझकर लंबे समय के लिए बेहतर ड्रेनेज और रेनवॉटर मैनेजमेंट सिस्टम तैयार करना है। गुरुग्राम में जलभराव की निगरानी के लिए हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (HARSAC) का WaterWatch Gurugram GIS आधारित प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध है, जहां सत्यापित जलभराव वाले स्थानों की जानकारी देखी और नए मामलों की रिपोर्ट की जा सकती है।

