सम्पादक की कलम से…….
समाचार पत्रों की उपयोगिता पर किसी शायर ने कहा है:
*”खींचो न कमानों को न तलवार निकालो,
जब तोप सामने हो तो अख़बार निकालो”*
प्रेस आज जितना स्वतंत्र और मुखर दिखता है, आजादी की जंग में यह उतनी ही बंदिशों और पाबंदियों से बँधा हुआ था। न तो उसमें मनोरंजन का पुट था और न ही ये किसी की कमाई का जरिया ही। ये अखबार और पत्र-पत्रिकाएँ आजादी के जाँबाजों का एक हथियार और माध्यम थे, जो उन्हें लोगों और घटनाओं से जोड़े रखता था। आजादी की लड़ाई का कोई भी ऐसा योद्धा नहीं था, जिसने अखबारों के जरिए अपनी बात कहने का प्रयास न किया हो। गाँधीजी ने भी ‘हरिजन’, ‘यंग-इंडिया’ के नाम से अखबारों का प्रकाशन किया था तो मौलाना अबुल कलाम आजाद ने ‘अल-हिलाल’ पत्र का प्रकाशन। ऐसे और कितने ही उदाहरण हैं, जो यह साबित करते हैं कि पत्र-पत्रिकाओं की आजादी की लड़ाई में महती भूमिका थी।
यह वह दौर था, जब लोगों के पास संवाद का कोई साधन नहीं था। उस पर भी अँग्रेजों के अत्याचारों के शिकार असहाय लोग चुपचाप सारे अत्याचार सहते थे। न तो कोई उनकी सुनने वाला था और न उनके दु:खों को हरने वाला। वो कहते भी तो किससे और कैसे? हर कोई तो उसी प्रताड़ना को झेल रहे थे। ऐसे में पत्र-पत्रिकाओं की शुरुआत ने लोगों को हिम्मत दी, उन्हें ढाँढस बँधाया। यही कारण था कि क्रांतिकारियों के एक-एक लेख जनता में नई स्फूर्ति और देशभक्ति का संचार करते थे।
तात्पर्य ये है कि समाचार पत्र पत्रिकाऐं हमेशा से समाज के रहन सहन, समाज की मानसिकता, और जनजागरण के साधन रहे हैं।
आज हमारे समाज मे फैली असमानताऐं स्वार्थी लोगों की सक्रियता से नहीं बल्कि बुद्धिजीवी लोगों की निष्क्रियता के कारण है।
” संवेदना पथिक” तेजी से मुखर होती हुई ऐसी आवाज है जो इस प्रगतिशील समाज मे जो आज भी पिछड़े हैं, शोषित और वन्चित हैं उनके उत्थान के लिए बुलंद हो रही है।
संवेदना पथिक समाचार पत्रिका समाज सेवा मे संलग्न है, वर्तमान मे दिल्ली, एनसीआर, हरियाणा, पंजाब, मध्यप्रदेश,उत्तरप्रदेश व उत्तराखंड मे प्रसारित हो रही है।
संवेदना पथिक, समाचार पत्रिका के साथ साथ एक जन जागरण अभियान भी है जो सामाजिक,आर्थिक व मानसिक असमानता को समाप्त कर, पर्यावरण, स्वास्थ्य व स्वच्छ भारत की दिशा में सबका साथ, सबका विकास और सबके प्रयास के मार्ग को प्रशस्त कर “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य प्राप्ति मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने हेतु दृढसंकल्पित है।
संवेदना पथिक प्रबंधन उन समस्त जागरूक, जीवन्त और समाज के प्रति सम्वेदनशील लोगों को सादर आमंत्रित करता है जो सामाजिक उत्थान और प्रगति के इस अभियान मे अपनी भूमिका निभाने का भाव रखते हैं।
-श्रीमति किरन